Thursday, September 19, 2013

मेरी मिल्कियत


ज़िन्दगी के हर पल...
हर अह्सास को संजो कर रखा है...
मैंने माँ की हर सीख को आंचँल में बाँध रखा है...
जब भी ज़रूरत होती हैं खर्च कर लेती हूँ...

इक यही तो मिल्कियत हैं जिसने मुझे अमीर बना रखा हैं..." (अर्चना)...

2 comments:

  1. वाह! बहुत सुन्दर रचना..

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  2. शुक्रिया संजय...

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