Monday, February 15, 2010

कुछ मीठे से सवाल

एहसास की धरती पर उगती है...कुछ अनकही सी बातें...कुछ भूली बिसरी यादें...वक्‍़त के कुछ गुज़रे लम्हे...कुछ अजन्मी सी भावनाएं...कुछ प्‍यार...कुछ छूटे हुए यार...कुछ धोखे...कुछ मेहरबानियाँ...और उस पर वो तल्‍ख़ मुस्‍कान लिए...कुछ प्यारे से दुश्मन...और मुझे सपनो के चाँद पर उड़ाते हुए वो तुम्हारे कुछ वादे....वो खुरदरी, पथरीली...नुकीली...बदहवास...हताश सी परछाइयाँ...वो थोड़ी सी रुसवाइयां...जब मेरे अतीत का कोहरा लिए छंटती हैं...तो स्‍मृतियों की आकृति में उठते हैं कई सवाल...जो मांगते है मुझसे जवाब...मेरे भीतर की रूह को झकझोर देते हैं...और कहते है...की क्या मैंने जो तुझे जिंदगी माना...और तुझ पर एतबार किया...क्या वो मेरा भ्रम था...या फ़लक से उतर आया वो चाँद था...जिसने मेरे एहसास की ज़मी पर तेरे ख्वाब बोये थे...जो आज अतीत के कोहरे में कहीं खो सा गया है...अर्चना....

2 comments:

  1. बहुत सुंदर और उत्तम भाव लिए हुए.... खूबसूरत रचना......

    संजय कुमार
    हरियाणा
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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  2. dil ko chhoone wali panktiyan. wakai mere bheetar ke rooh ko jhakjhor dete hain. bahut khoobsurat rachna. aal d best

    katya

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